
हरियाणा के राजकीय स्कूलों में मिड डे मील (मध्याह्न भोजन) के नाम पर खूब फर्जीवाड़ा हो रहा है। स्कूलों की ओर से न तो मिड-डे-मील का डाटा अपडेट किया जा रहा है और न ही मौलिक शिक्षा निदेशालय के आदेशों की अनुपालना हो रही है। मिड डे मील ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या का कोई पुख्ता डाटा निदेशालय को मुहैया करवाने की बजाय राशन की कमी की रिपोर्ट भेजी जा रही है। यह स्थिति तब है जब आज से 10 साल पहले स्कूलों में मिड डे मील के नाम पर हुई गड़बड़ी की सीबीआई जांच चल रही है। सीबीआई की टीम इस मामले को लेकर के हरियाणा के स्कूलों का दौरा भी कर रही है और वह सारे रिकॉर्ड को कंगाल रही है लेकिन इसके बावजूद सरकारी स्कूल के मुख्य अध्यापक और मिड डे मील के इंचार्ज इससे कोई सबक नहीं ले रहे हैं और लगातार मिड डे मील की कमी की रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेज रहे हैं और डाटा अपलोड करने में कोताही बरत रहे हैं।
कार्रवाई करने का फैसला
शिक्षा निदेशालय ने लापरवाही और हर रोज डाटा अपडेट नहीं होने पर न केवल मिड-डे-मील इंचार्ज, बल्कि स्कूल मुखियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया है। जिला स्तर पर मिड-डे-मील में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए मौलिक शिक्षा महानिदेशक ने हिदायत दी है कि अब हर महीने नहीं, बल्कि हर रोज डाटा एमआईएस पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा।
विद्यार्थियों की संख्या से ज्यादा मंगवाया जा रहा राशन
निदेशालय के संज्ञान में आया है कि विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से राशन ज्यादा मंगवाया जा रहा है। इसके बावजूद राशन की कमी की रिपोर्ट भेजी जा रही है। मौलिक शिक्षा महानिदेशक की ओर से अब तब जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों के साथ 20 बार पत्राचार किया जा चुका है, जिसमें डाटा अपडेट करने को कहा गया, लेकिन स्कूल मुखियाओं की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया है।
निदेशालय द्वारा जिला मौलिक शिक्षा अधिकरियों को लिखे पत्र में कहा गया कि अधूरी रिपोर्ट स्वीकार नहीं होगी। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम पोषण) योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा मिड-डे-मील पोर्टल पर मासिक डाटा अपडेट करने की हर महीने 10 तारीख निर्धारित की गई है। 10 तारीख के बाद पोर्टल बंद हो जाता है। प्रदेश के राजकीय स्कूलों द्वारा अभी तक अक्टूबर माह का डाटा भी पोर्टल पर अपडेट नहीं किया गया है। फतेहाबाद, हिसार, नूंह और सोनीपत जिलों में स्थिति काफी खराब है। रिपोर्टिंग में ढिलाई से योजना की पारदर्शिता और केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले राज्य के आंकड़े प्रभावित होने का हवाला दिया गया है।
कैसे कर रही सीबीआई जांच
पूरे प्रदेश में मिड-डे मील और फर्जी दाखिलों के घोटाले की जांच के तहत सीबीआई टीम राजकीय विद्यालयों में पहुंचकर विद्यालयों का निरीक्षण कर करीब दस साल पुराने रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही है। वर्ष 2014-15 और 2015-16 के शैक्षणिक सत्रों में राजकीय विद्यालयों में छात्रों के फर्जी दाखिले और मिड-डे मील में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों पर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। टीम ने राजकीय विद्यालयों में अध्यापकों से पूछताछ कर बच्चों से भी जानकारी ले रही है।
सीबीआई की टीम और शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि वर्ष 2014-15 और 2015-16 में राजकीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इसी को लेकर सीबीआई की टीम प्रदेशभर के स्कूलों में जाकर रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इसके लिए विद्यालयों के मुखियाओं को पहले से सूचित कर दिया गया है कि वे दोनों वर्षों का पूरा रिकॉर्ड तैयार रखें।